Rakshabandhan poem / साथ काफी है...(भाई-बहन)


भाई को बहन का साथ काफी है,
         वो उसके साथ का,
   एक अनोखा एहसास काफी है..........
        एक बहन का होना ,
 भाई के दर्द में उसका सदा रोना,
        भूल जाऊँ भला कैसे?

  •  रिश्ता है हमेसा साथ का उससे ,

     अनूठे एहसास का उससे,
खाली पड़े इस जीवन के चित्र में,
       बहन के हाथों डाले गए,
       वो कुछ ही रंग काफी है,
  भाई को बहन का साथ काफी है,
       वो उसके साथ का,
 एक अनोखा एहसास काफी है.......||1||
      बैठने को कंधे पर भाई के,
   पैर में चोट का बहाना बनाना,
       कुछ दूर चलकर फिर,
     वो उसका दौड़ कर जाना,
अंगूठा और जीभ दिखा-दिखा कर,
     वो उसका भाई को चिढ़ाना,
लड़ना-झगड़ना फिर हमेशा वो उसके रूठने पर,
           भाई का प्यार से उसको मनाना ,
       पकड़ कर कान फिर दोनों,
        भाई का उठा-बैठक लगाना,
रूठ कर मनाने का वो एहसास बाकी है,
    भाई को बहन का साथ काफी है,
           वो उसके साथ का,
    एक अनोखा एहसास काफी है.......||2||
                    बहन के हाथों से
 जब भाई की कलाई पर राखी बाँधी जाती है,
          मांग वचन जब अपने होने का,
            भाई पर अधिकार जताती है,
   जो हँसकर-रोकर अपने सब फ़र्ज निभाती है,
             अब उसकी राखी के,
                     हे नंदन ,
             कुछ कर्ज चुकाने है,
         कुछ दिये वचन निभने है,
   कुछ दायित्वों का निर्वाह्न करना है,
मुझे उसके भाई कहने से मिला सम्मान काफी है,
  वो उसके प्यार का मुझ पर ऐहसान बाकी है,
        भाई को बहन का साथ काफी है,
               वो उसके साथ का,
        एक अनोखा एहसास काफी है....... ||3||


                   By - नन्दकिशोर पटेल (नंदन)
study at 1st year (B.H.M.S.)
S.P.H. MEDICAL COLLAGE & HOSPITAL, Chhatarpur (M.P.)
mob. no. - 7000176647
add.- village & post soura , teh. chhataepur, dist. chhatarpur [m.p.]