Farewell function for my teacher dr. M.I. Khan/यादें with नंदकिशोर पटेल

        Farewell function for my teacher

                          Dr. M.I.Khan.

                     Writer:- Nandkishor Patel
                                        (BHMS 1st Year)


Introduction:- dr. Ishak khan का जन्म 24जून1984 को मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले में हुआ। इनकी माता का नाम- Kulsum bano (कुलसुम बानो) तथा पिता का नाम- Mohammad Yakub (मोहम्मद याकूब) है।
Ishak khan सर एक बहुत ही अलग
व्यक्तित्व वाले है, उनके साथ ऐसा नहीं लगता की हम किसी गंभीर व्यक्ति के साथ है, कभी फ्रेंड्स की तरह, कभी बड़े भाई की तरह कभी तो कभी माता-पिता की तरह व्यवहार किया करते थे। हाँ, पर एक शिक्षक जे दायित्वों को कभी इसके बीच नही आने दिया। उन्होंने हमेसा ही एक अच्छे गुरु की भाँति हमे हमेशा डांटे रखा और गुरु और शिष्य की रिश्ते को हमेशा बनाये रखा। उनके अंदर मुझे एक बात हमेशा शंका में रखती है की में उनके व्यवहार को शायद समझ नही पता उनके साथ ये मालूम नही होता की वो कब मजाक कर रहे है और कब गंभीर हो जाये इसका पता तो शायद ही किसी को होगा। उनकी यही बात मुझे हमेशा उनके सामने कुछ भी बोलने पर एक बार सोचने के लिए मजबूर करती थी, और शायद जब भी उनके सामने जाउगा तो करती रहेगी। सही भी ये डर मुझे हमेशा ही उनके सामने मर्यादा में रखेगा, बर्ना कभी-कभी हम अनजाने में ऐसा कुछ बोल जाते है जो शायद हमे नही बोलना चाहिये।

Ishak khan sir और मैं:- जब में collage गया तो तो.....जब हमारी क्लास में पढाने आये तो पहले तो सब ठीक-ठाक पर जब में उन्हें अच्छे से पहचानने लगा  उनसे बात की उन्हें जितना जाना था उस समय तक तो लगा की बो बहुत ही गंभीर व्यक्तित्व वाले है क्योंकि मैंने उन्हें collage परिसर में ऐसे ही देखा था लेकिन फिर एक बार मेरी तबियत खराब हुई और में उन्हें दिखने ...के क्लीनिक पर गया, तब मैंने देखा की उनका व्यवहार मेरी सोच से बिल्कुल अलग था ऐसे लगा मानो जैसे सूरज पश्चिम दिशा से उग गया हो! उस दिन से अक्सर ही Ishak khan sir के क्लीनिक पर जाना हुआ करता था कभी दवा लेने तो कभी उनसे पढने और कभी-कभी दवा का बहाना लेकर सर से मिलने उनसे बातें करने उन्हें थोडा और समझने । बस इस तरह मेरी कसक उनके लिए हमेशा बनी रही।

                    *I Miss You Sir*

            *Sir मैं और कॉलज का क्लासरूम*

*शुरुआत के 4 महीने(jan., feb,mar.,apr.)* :-  शुरुआत के कुछ दिन क्लास में सामान्य गुजरे फिर कुछ टीचर्स के lectures और Ishak khan sir के लेक्चर फिर शुरू हुआ सिलसिला प्रश्नों का और khan sir की क्लास में एंट्री और सबकी नजरे नीचे, सर के प्रश्न और पूरी क्लास खड़ी हो गई, कुछ बता पते और फिर अटक गये, और खड़े रहे।
सर के लेक्चर शुरू बेटा पढो ये तो बेसिक है जब ये नही आ रहा तो आगे क्या करोगें। अगर कल पढ़ कर नही आये तो पूरी क्लास को बाहर निकल देंगे। बस इतना ही रोज का लेक्चर होता था। और सर के बाहर जाने के बाद सब स्टूडेंट यार कल से पढ़ के आना हे कल पक्का बाहर कर देगें सर! और ऐसे ही चलता रहा और मई में समर वेकेशन की छुट्टियां लग गई।

*समर वेकेशन के बाद(July., Aug., Sep., oct.*:- समर वेकेशन खत्म हुई और जुलाई को जो डॉक्टर्स डे के रूप में मनाया जाता है का प्रोग्राम हमारी क्लास की तरफ से कॉलेज में सभी डॉ. के सम्मान के लिए आयोजित कराया गया। उसमे khan sir जब सभी प्रोफेसर ने बोला की कार्यक्रम अच्छा था तो सुनकर लगा की हमारी मेहनत सफल हो गई। लेकिन उसी दिन शाम को हमारे करंट सीनियर का रिजल्ट आया तो ..... सर के लेक्चर फिर बेटा कार्यक्रम तो ठीक हे अब पढ़ो बर्ना ऐसे ही होगा फिर रोना बैठ के। और अगले 3-4 दिन बाद क्लाससे शुरू और सभी टीचर्स की एक ही बात रिजल्ट तो देख ही लिया होगा? फिर हमारे Khan sir की क्लास और आते ही - नंदकिशोर खड़े हो जाओ, पढ़ाई तो हो नी रही होगी? और हमारे साथ पूरी क्लास खड़ी सबका सिर नीचे और सामने से Khan sir के  लेक्चर फिर वही कल कोई भी पढ़के नही आया तो पीछे की डेक्स पर खड़ा कर देंगे या क्लास से बाहर कर देंगे फिर सब टीचर और सीनियर पूछेगे क्यों नंदकिशोर क्यों खड़े हो बाहर ? फिर बताना क्यों खड़े हो। बस मेरा और सर का रोज का यही था सर क्लास में आयेगे और प्रथम प्रश्न क्यों नंदकिशोर पढ़ाई तो हो नही रही है चलो बताओ और प्रश्न शुरू। ये सब ऐसे हो गया की मेरी पूरी क्लास पूछने लगी क्यों यार सर तेरे ही पीछे क्यों पड़े रहते हे हमेशा तुझे ही खड़ा करते है? ये प्रश्न मुझे सोचने पर मजबूर करते थे सर के लिए, सही भी था, मेरे मन में भी शुरुआत में ऐसा ही लगता था की आखिर मै ही क्यों? लेकिन एक दिन में Khan sir के बारे में बैठ कर सोच रहा था तो मुझे लगा की सब क्यों नही ? और सिर्फ में ही क्यों? इसके दो जबाब मेरे मन में आये पहला मुझसे बो चिढ़ते है और मुझे हमेशा नीचा दिखाना चाहते है और दूसरा की वो मुझसे कुछ आशा करते है वो चाहते हे की में कुछ कर सकूँ अपने जीवन में।
अब दो प्रश्नो में पहले प्रश्न का जबाब सामने आया की एक गुरु कभी भी अपने शिष्य ले लिए ऐसे नही सोचता और फिर अगर एस होता तो वो मुझे हर जगह मदद नही करते मेरा सपोर्ट क्यों करते हैं? फिर बस एक ही जबाब सामने था की वो चाहते हे की में कुछ अलग करूँ और उस दिन मेरे 2घंटे बैठ कर उनके बारे में सोचने के बाद उनके लिए मेरी नजर और नजरिया दोनों बदल गए उसदिन से मुझे और ख़ुशी होने लगी की कोई तो है यहाँ जो मुझे दिल से बढ़ता हुआ देखना चाहता है और हकित भी यही है अब कोई भी कुछ कहे। अब उस दिन से में उन्हें जब भी देखता हूँ और वो कुछ कहते है या डाँटते है तो बाहर कुछ भी हो लेकिन अंदर एक बहुत अजीव सी ख़ुशी का अनुभव होता है की सर दिल से चाहते है!            

                      Thank you sir

                      I Miss You Sir

*नवम्बर(Nov)*-  नवम्बर माह प्रारम्भ हुआ और इस माह में हमारी परीक्षा की दिनांक भी आ गई थी और इसी माह में हमारे प्री-यूनिवर्सिटी परीक्षा भी थी जो 20 नवम्बर को समाप्त हुई थी। और इस परीक्षा को लेकर ही सबके मन में बहुत डर था हाँ ! लेकिन जितना डर रहे थे ऐसा कुछ नही था लेकिन अब सब मुझे बोल रहे थे की जिस दिर सर की ड्यूटी लगी उस दिन नंदकिशोर तुम्हारा क्या होगा? इससे डर तो मुझे भी लग रहा था कि जब सर ड्यूटी होगी तो उस दिन मुझे अलग बैठाया जायेगा सबसे आगे वाली बैंच पर और उससे भी ज्यादा डर तो इस बात का लग रहा था की सर कहीं सामने न बैठ जाएं। लेकिन ये सोच कर तसल्ली कर लेता था की कौन सा उनकी दुश्मनी है मुझसे जो ऐसा करेंगे और जो होगा देखा जायेगा।
फिर बो दिन भी आ गया जब उनकी ड्यूटी लगी और जो सोचा था शायद वैसा ही हुआ किसी को एक शब्द भी पूछने नही मिला ऐसा लगा जैसे अब ऐनुअल परीक्षा में बैठे है। हाँ! लेकिन मेरी सभी शंकाएं एक बार फिर दूर हो गई क्योकि मेरे लिए कुछ अलग से नही कहा गया था। बस इस तरह इन खट्टी-मीठी यादों के साथ कब एक साल निकल गया पता ही नही चला😢

                 I Miss You Sir


*Farewell function*:- 
farewell function in  *S.P.H. MEDICAL COLLEGE Chhatarpur* परिसर दि.-25नवम्बर दिन शनिवार, समय दोपहर 12:28 वो एक व्यक्ति जिसका रंग हल्का-सा सावला, सिर पर बाल थोड़े-से कम, पैर में काले जूते, काला पेन्ट, सफेद शर्ट, गले में काली बिंदी वाली लाल टाई, काला कोट, बाये हाथ में घड़ी पहनें और दायें हाथ में मोबाईल पकड़े वो लगभग 5फिट8इंच का युवा थोडा हँसमुख थोडा गम्भीर मानो कोई विद्वान जान पड़ता है। सभी लोग जाकर उसके पास फ़ोटो लेते और बाते करते मानो कोई बड़ी हस्ति हो। पूरे परिसर में सबकी नजर उनपर ही थी और सब उनके ही आसपास नजर आ रहे थे। तो मै भी पंहुचा और उन्हें चरणस्पर्श करते हुए बधाई दी । वो कई और नहीं हमारे Ishak Khan sir थे हाँ! लेकिन उनके चहरे पर जो सबने नही देखा वो मैने देखा जब उनके चहरे को देखा था तो जाने क्यों ऐसा लगा की मेरे मन की कश्मकश और उनके चहरे के भाव एक-दूसरे से मेल खा रहे हों। जैसे मुझे लग रहा था वही उनका चेहरा बोल  रहा था। मै तो इस कश्मकश था की यहाँ एक तरफ तो उनके M.D. में चयन होने की ख़ुशी है और दूसरी ओर उनके अपने महाविद्यालय से दूर जाने का दुःख! इसी कश्मकश में वो पल भी निकल गये।

वो मुझे हमेसा याद आयेंगे
लेकिन मैने भी उन्हें कुछ यादगार दिया जिसे देख कर शायद उन्हें में हमेशा याद आऊंगा ।

               I Miss You Sir



  By - नन्दकिशोर पटेल (नंदन)

study at 1st year (B.H.M.S.)

S.P.H. MEDICAL COLLAGE & HOSPITAL, Chhatarpur (M.P.)

mob. no. - 7000176647

add.- village & post soura , teh. chhataepur, dist. chhatarpur [m.p.]

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