वसंत पंचमी 2019

वसंत पंचमी को श्रीपंचमी नाम से भी जानते हैं।  इस बार यह 10 फरवरी को मनाई जा रही है। ऐसा माना जाता है कि वसंत पंचमी के दिन ही मां सरस्वती की उत्पत्ति हुई थी। 

वसंत का महत्व


हिन्दू धर्म की मानताओं के अनुसार वसन्तोसव को प्रकृति का उत्सव कहा जाता है। जिस प्रकार यौवन हमारे जीवन का वसंत होता है उसी प्रकार वसंत को इस सम्पूर्ण सृष्टि का यौवन कहा जाता है।
भगवान श्रीकृष्ण ने भागवत गीता में वसंत ऋतु को "ऋतूनां कुसुमाकर:" कहकर अपनी विभूति कहा है। शास्त्रों और पुराणों की कथाओं के अनुसार वसंत पंचमी और माँ सरस्वती की उत्पत्ति व् पूजा-अर्चना को लेकर एक बहुत ही रोचक कथा है।।

माँ सरस्वती की उत्तपत्ति कथा


जब सृष्टि में हलचल नहीं थी,सम्पूर्ण सृष्टि मौन थी, सभी जीव-जन्तु ज्ञान सम्पन्न नहीं थे, तब अशांत ब्रह्मा को नारायण भगवान ने ज्ञान दिया। तब उन्होंने अपने कमंडल से जल पृथ्वी पर छिड़का जिसके फलस्वरूप चतुभरुजी मां सरस्वती वीणा, पुस्तक और माला के साथ वर प्रदान करती प्रकट हुईं। ब्रह्मा जी के अनुरोध करने पर उन्होंने वीणा बजाया उनके वीणा बजाते ही खामोश बैठे सभी जीवों में वाणी प्रकट हो गई, ज्ञान का संगीत रोम-रोम में बजने लगा। और सभी देवता व मनुष्य सभी मां सरस्वती की पूजा अराधना करने लगे। इसीलिए वसंत पंचमी को मां सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं। इस दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है।
तथा इस दिन महिलाएं पीले वस्त्र धारण करती हैं।


शास्त्रों में मां सरस्वती के 12 नामो का वर्णन किया गया हैं। ऐसा कहा जाता है कि इन नामों का नियमित रूप से ध्यान करने वाले मनुष्य की जिह्वा के अग्रभाग में मां सरस्वती का वास करने लगती है। इतना ही नहीं विद्या की देवी मां सरस्वती सदैव उस व्यक्ति की सहायता करती हैं।


श्लोक के रूप में माँ सरस्वती के 12 नाम-


प्रथम भारती नाम, द्वितीय च सरस्वती

तृतीय शारदा देवी, चतुर्थ हंसवाहिनी

पंचमम् जगतीख्याता, षष्ठम् वागीश्वरी तथा

सप्तमम् कुमुदीप्रोक्ता, अष्ठमम् ब्रह्मचारिणी

नवम् बुद्धिमाता च दशमम् वरदायिनी

एकादशम् चंद्रकांतिदाशां भुवनेशवरी

द्वादशेतानि नामानि त्रिसंध्य य: पठेनर:

जिह्वाग्रे वसते नित्यमं

ब्रह्मरूपा सरस्वती सरस्वती महाभागे

विद्येकमललोचने विद्यारूपा विशालाक्षि विद्या देहि नमोस्तुते”




- सरस्वती महाभागे विद्ये कमललोचने
विद्यारूपा विशालाक्षि विद्यां देहि नमोस्तुते॥
या देवी सर्वभूतेषू, मां सरस्वती रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

- ऐं ह्रीं श्रीं वाग्वादिनी सरस्वती देवी मम जिव्हायां।
सर्व विद्यां देही दापय-दापय स्वाहा।।

- एकादशाक्षर सरस्वती मंत्र
ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः।

- वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि।
मंगलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणी विनायकौ।।

- सरस्वत्यै नमो नित्यं भद्रकाल्यै नमो नम:।
वेद वेदान्त वेदांग विद्यास्थानेभ्य एव च।।
सरस्वति महाभागे विद्ये कमललोचने।
विद्यारूपे विशालाक्षी विद्यां देहि नमोस्तुते।।



मां सरस्वती की वन्दना और उनकी महिमा का गुणगान करता यह मंत्र सनातन धर्म के मानने वालों को वैसे तो हर दिन करना चाहिए। लेकिन यदि मन्त्र जाप प्रत्येक दिन नहीं कर सकते तो कम से कम उनके प्रकट दिवस यानी वसंत पंचमी (22 जनवरी 2018) को जरूर करना चाहिए।

इस वर्ष सोमवार दिन दोपहर तक ही मुहूर्त है। विद्या की देवी माँ सरस्वती की पूजा गणोश जी के साथ जरूर करनी चाहिए। जो लोग इस दिन पूजा नहीं कर सकते, वे कम से कम इस दिन पीले वस्त्र जरूर पहनें। धन की कमी न हो तो पुस्तकें और शिक्षा से जुड़े उपकरण जरूरतमंद छात्र-छात्रओं को प्रदान करें, ताकि मां सरस्वती के अवतरित होकर पृथ्वी पर मौजूद हर मनुष्य को शिक्षित करने का उद्देश्य पूर्ण हो सके। मां सरस्वती केवल लेखकों, संगीतकारों, विद्वानों तक ही सीमित नहीं हैं उनपर सबका समान अधिकार है, बस मन साफ और निष्कपट होना चाहिये ।।

वे उन सभी को सम्मानित करती हैं, जो अपने-अपने घर में परिवार के सभी सदस्यों को आनंद प्रदान करते हैं। छल-कपट से दूर रहते हैं। जहां सरस्वती हैं, वहां निर्मल आनंद तो रहता ही है। 


 देखा जाए तो सनातन धर्म में रूप की जगह ज्ञान को सदैव प्रधानता प्रदान की जाती है। ऋग्वेद में इस तरह मां सरस्वती का गुणगान किया गया है- ‘प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिव्रजिनीवती धीनामणित्रयवस्तु।’ अर्थात् ये परम चेतना हैं।

सरस्वती के रूप में ये हमारी बुद्धि, प्रज्ञा और मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं। हमारे भीतर जो मेधा है, उसका आधार भगवती शारदा ही हैं। भगवान कृष्ण ने कहा भी है कि वे ऋतुओं में वसंत हैं। कवि, लेखक, गायक, वादक, नृत्यकार आदि सब इस दिन की शुरुआत अपने उपकरणों की पूजा से करते हैं। मां सरस्वती की पीले फूलों, पीले लड्डू और केसर युक्त खीर आदि से पूजा की जानी चाहिए। ज्योतिष के हिसाब से देखा जाए तो मां की मीन राशि है। इस दिन किसी मुहूर्त की जरूरत नहीं होती। इसलिए विवाह आदि इस दिन करना शुभ माना जाता है।

‘या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रवृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।। या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देव




                   By - नन्दकिशोर पटेल (नंदन)
study at 1st year (B.H.M.S.)
S.P.H. MEDICAL COLLAGE & HOSPITAL, Chhatarpur (M.P.)
mob. no. - 7000176647

add.- village & post soura , teh. chhataepur, dist. chhatarpur [m.p.]

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