जाती और धर्म की आंधी..
कुछ मंद हो जाए,
घटित हो कुछ यहां ऐसा...
कि फिर आनंद हो जाए,
मिटे सब वैर मन का और
मधुर संबंध हो जाए,
मेरा-तेरा तेरा-मेरा सब बन्द हो जाए,
हे वीणावादनी कुछ शब्द दो ऐसे
कि गद्य भी अब छंद हो जाए,
काश ये मेरा मुक़म्मल बंध हो जाए,
कुछ कृपा करो ऐसी मेरे यीशु, मेरे भगवन,
मेरे अल्लाह, मेरे दाता..
की हर युवा सभल करके विवेकानंद हो जाए।।

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